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बुखार, कफ और थकान… कोरोना जैसे हैं H3N2 वायरस के लक्षण, एक्सपर्ट से जानें बचाव के उपाय

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देशभर में H3N2 वायरल के केस तेजी से बढ़ रहे हैं. H3N2 इन्फ्लुएंजा की चपेट में आने के बाद लोगों को कमजोरी और थकान से उबरने में 2 सप्ताह से अधिक समय लग रहा है. कोविड-19 के बाद इन्फ्लुएंजा A वायरस के बढ़ते मामले अब मेडिकल एक्सपर्ट्स की टेंशन भी बढ़ा रहे हैं. क्योंकि इसके लक्षण कोरोना जैसे ही हैं. इन्फ्लुएंजा के मरीजों में तेज बुखार, लगातार खांसी और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत पाई जा रही है. इस बात की भी आशंका है कि क्या ये कोविड-19 तो नहीं. हालांकि इसे लेकर एक्सपर्ट्स ने बताया कि दोनों में बड़ा अंतर है.

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H3N2 और COVID-19 में क्या अंतर है?

एम्स के मेडिसिन डिपार्टमेंट के प्रोफेसर पीयूष रंजन कहते हैं कि कोविड निचले रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट यानी श्वसन पथ को प्रभावित करता है. जबकि H3N2 ऊपरी रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट को प्रभावित करता है. जैसे बुखार, खांसी, सर्दी, गले, नाक और आंखों में जलन का लंबे समय तक बने रहना. दरअसल, दोनों के लक्षण समान हैं और यह तेजी से फैल रहा है. वहीं, कुछ निजी अस्पताल H3N2 के लिए टेस्ट कर रहे हैं, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि ये जांच अनावश्यक और महंगी है. क्योंकि इसके टेस्ट सरकारी अस्पतालों में नहीं किए जा रहे हैं. जबकि प्राइवेट हॉस्पिटल H3N2 की जांच के लिए 6000 रुपये तक चार्ज कर रहे हैं.

H3N2 वायरल संक्रमण की तरह

एम्स के मेडिसिन डिपार्टमेंट के प्रोफेसर पीयूष रंजन ने कहा कि H3N2 भी एक वायरल संक्रमण की तरह है. हम इन्फ्लूएंजा स्वाइन फ्लू वायरस या H1N1 के बारे में सुनते थे. इसके दो एंटीजेनिक रूप हैं. H एंटीजन और N एंटीजन. H1 की तरह ही H3 भी एक वैरिएंट है और N1-N2 की तरह ही एक वैरिएंट है. यह बूंदों से फैलता है. इसमें सांस लेने में तकलीफ होती है. लेकिन हमें कोविड से सावधानियां बरतने की जरूरत है. सामान्य खांसी और जुकाम की स्वच्छता बनाए रखें.

सामान्य इलाज से मिल जाती है राहत

एम्स के पल्मोनोलॉजी विभाभ के अनंत मोहन बताते हैं कि मेरी राय में H3N2 की जांच बहुत गंभीर और अप्रत्याशित मामलों के लिए हैं. या मरीज ठीक नहीं हो रहा है. या फिर ऐसे केस जो पकड़ में नहीं आ रहे और इन्फ्लुएंजा संक्रमण के मामले में अतिसंवेदनशील हैं. हमने नोट किया है कि इस बार लगातार सूखी खांसी के मरीज ज्यादा है. इसके अधिकांश मरीज बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं. इस इन्फ्लूएंजा वाले अधिकांश लोगों को छाती के एक्स-रे की आवश्यकता नहीं होती है.

H3N2 के लक्षण

– नाक से पानी आना

– तेज बुखार

– लगातार खांसी (पहले गीली फिर सूखी)

– छाती में रक्त संचय

‘इम्युनिटी सिस्टम हो रहा कमजोर’

दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ धीरेन गुप्ता बताते हैं कि एक एडिनोवायरस के 60 सब टाइप होते हैं, इसमें से 14 सबटाइप गंभीर होते हैं. इसने न केवल 2 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों को अपनी चपेट में लिया है, बल्कि इम्युनिटी सिस्टम को भी कमजोर किया है. इससे गंभीर निमोनिया का खतरा बढ़ गया है. इसके चलते ICU में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है. हमारे पास एडिनोवायरस का कोई निश्चित इलाज भी नहीं है. इसलिए, हम अनुमान लगा रहे हैं कि ऐसा क्यों हो रहा है. बहुत संभावना है कि कोविड के कारण हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी सिस्टम कमजोर हो गया है. ऐसे में न सिर्फ इस वायरल संक्रमण के केस बढ़े हैं. बल्कि इस संक्रमण की गंभीरता भी बढ़ गई है.

‘कोविड के बाद बढ़ गईं बीमारियां’

डॉक्टर गुप्ता ने कहा कि पिछले एक साल में, हम उम्मीद कर रहे थे कि इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारियां कोविड के बाद कम हो जाएंगी. लेकिन हुआ इसका उल्टा. मेटा-वायरस, राइनो वायरस, एडिनोवायरस, इन्फ्लुएंजा वायरस जैसे वायरस का संक्रमण बढ़ गया है. दूसरी असामान्य बात यह है कि यह ऊपरी रेस्पिरेटरी ट्र्रैक्ट को प्रभावित कर रहा है. जैसे गले, नाक और आंखों में जलन लंबे समय तक बने रहना. एडिनोवायरस और इस वायरस से संक्रमित मामलों की संख्या आम तौर पर 5% से कम होती है, जो अब बढ़ गई है. इसके कारणों का अभी भी पता लगाया जा रहा है.

कानपुर में तेजी से बढ़ रहा प्रकोप

मौसम के बदलाव के साथ ही H3N2 वायरस का प्रकोप तेज हो गया है. कानपुर के सबसे बड़े सरकारी हैलट अस्पताल के साथ-साथ निजी अस्पतालों में भी बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं. हालांकि H3N2 अभी तक टेस्टिंग में नहीं आया है, लेकिन लोगों में जो लक्षण दिख रहे हैं वो इस वायरस के ही मिल रहे हैं. हैलट अस्पताल की इमरजेंसी भर जाने के बाद लोगों को अलग-अलग वार्डों में शिफ्ट किया गया है. जहां उनकी देखभाल की जा रही है.

केस-1

मरीज के साथ आए तीमारदार ने बताया कि उनके मरीज को सांस लेने में तकलीफ हो रही है, जिसके बाद वह औरैया से कानपुर आए हैं. उन्होंने कहा कि हमारे मरीज को पिछले 5 से 6 दिन से बुखार है. खांसी की शिकायत है, सांस की तकलीफ बढ़ी तो कानपुर ले आए.

केस-2

दूसरे मरीज के साथ आए परिवारीजन ने बताया कि वह कानपुर देहात से आए हैं. उनके मरीज को भी सांस लेने में तकलीफ हो रही थी. लगातार खांसी आ रही थी. डॉक्टर ने कई टेस्ट बताए हैं.

एक दिन में सांस संबंधी समस्या के 24 मरीज भर्ती

कानपुर के हैलट अस्पताल के मेडिसिन विभाग की प्रमुख ऋचा गिरी ने बताया कि हर साल मौसम में बदलाव के कारण ऐसे कई मामले देखने को मिलते हैं, लेकिन इस बार मरीजों की संख्या काफी ज्यादा है, जो खांसी, बुखार और सांस लेने में तकलीफ से पीड़ित हैं. पिछले एक दिन की बात करें तो सांस लेने में तकलीफ की शिकायत पर 23-24 मरीज ही भर्ती हुए हैं, जिन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट दिया जा रहा है. किसी को वेंटीलेटर पर रखा गया है तो किसी को बाइपैप मशीन का सहारा दिया जा रहा है.

डॉ. ऋचा गिरी के मुताबिक इस वायरस को कोविड-19 से अलग करना मुश्किल है. क्योंकि यह टेस्ट के बाद ही संभव है, क्योंकि यह इन्फ्लुएंजा ए का सबटाइप है, तो इसकी जांच करना मुश्किल हो जाता है. क्योंकि इसके लिए अलग किट होती है. ताकि जांच रिपोर्ट सही आ सके.

दिल्ली और यूपी में बढ़े केस

यूपी के कई अस्पतालों में मामलों में 30% की वृद्धि देखी जा रही है. जबकि दिल्ली के अस्पतालों में वायरल संक्रमण के मामलों में 20% की वृद्धि देखी जा रही है.