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एक श्राप की वजह से ब्रह्मा जी की नहीं होती है पूजा, दुनिया में है एकमात्र मंदिर, रोचक है पौराणिक कथा

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इस सृष्टि का रचियता ब्रह्मा जी को माना जाता है. हिंदू धर्म ग्रंथों और पुराणों में इसका जिक्र मिलता है. ब्रह्मा सृष्टिकर्ता, विष्णु पालनकर्ता और महेश संहारक माने जाते हैं. हिंदू धर्म में वैसे तो सभी देवी-देवताओं की अलग-अलग तरीके से विधिपूर्वक पूजा-अर्चना का विधान है, लेकिन ब्रह्मा जी की पूजा नहीं की जाती है. इतना ही नहीं सभी देवी-देवताओं के दुनियाभर में ढ़ेरों मंदिर या देवस्थान मिल जाएंगे लेकिन सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी का दुनिया में सिर्फ एक ही मंदिर है जो कि राजस्थान के पुष्कर जी में स्थित है. आखिर ऐसा क्यों है कि ब्रह्मा जी की पूजा नहीं की जाती है. पौराणिक कथाओं के अनुसार इसकी वजह उन्हें मिला एक श्राप है.देवी सावित्री द्वारा दिए गए श्राप की वजह से ब्रह्मा जी की पूजा करना वर्जित माना जाता है. इंदौर के रहने वाले पंडित नवीन उपाध्याय के अनुसार श्राप की वजह से सभी देवताओं में सिर्फ ब्रह्मा जी का ही पूजन नहीं किया जाता है. इसके पीछे की पौराणिक कथा भी काफी रोचक है. आइए जानते हैं इसके बार में…

 

इस वजह से ब्रह्मा जी को मिला था श्राप
ब्रह्मा जी को दिए गए श्राप को लेकर पुराणों में बताया गया है कि एक बार ब्रह्मा जी के हाथ से कमल का फूल धरती पर गिर गया, जिस वक्त वे अपने वाहन हंस पर सवार होकर अग्नि यज्ञ के लिए सही स्थान की तलाश कर रहे थे. जिस स्थान पर कमल गिरा, वहां पर एक झरना बना और उसमें 3 सरोवरों का निर्माण हो गया. जिन जगहों पर सरोवर बनें उन्हें ब्रह्म पुष्कर, विष्णु पुष्कर और शिव पुष्कर के नाम से आज जाना जाता है.

जब ब्रह्मा जी ने देखा कि कमल के गिरने से सरोवरों का निर्माण हुआ है तो उन्होंने उसी जगह पर अग्नि यज्ञ करने का निर्णय लिया. यज्ञ के लिए ब्रह्मा जी के साथ उनकी पत्नी का होना आवश्यक था लेकिन उनकी पत्नी सावित्री वहां नहीं थीं और शुभ मुहूर्त निकला जा रहा था. इसे देखते हुए ब्रह्मा जी ने उस समय वहां मौजूद एक स्त्री से विवाह कर उनके साथ यज्ञ को संपन्न किया.

जब ये बात देवी सावित्री के पास पहुंची तो वे काफी कुपित हो गईं और उन्होंने ब्रह्मा जी को श्राप दिया कि जिसने पूरी सृष्टि की रचना की है, उसी की सृष्टि में कहीं भी पूजा नहीं की जाएगी. इसके साथ ही पुष्कर के अलावा विश्वभर में कही ब्रह्मा जी का मंदिर नहीं होगा. इसी श्राप की वजह से ब्रह्मा जी की पूजा नहीं होती है.