5 मई को साल का पहला चंद्रग्रहण, क्या है इसकी खासियत, सूतक काल में इन कामों को करने से बचें

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साल 2023 का पहला चंद्र ग्रहण 5 मई को बुद्ध पूर्णिमा के दिन लगेगा. चंद्र ग्रहण से पहले 10 अप्रैल को साल का पहला सूर्य ग्रहण लगा था. धार्मि​क मान्यताओं के अनुसार, जब राहु और केतु सूर्य या चंद्रमा का ग्रास करने का प्रयास करते हैं तो उस समय ग्रहण लगता है. राहु और केतु की एक कथा समुद्र मंथन के बाद निकले अमृत के पान से जुड़ी हुई है. चंद्र ग्रहण जब अपने देश में लगता है तो वह दृश्य होता है और उसका सूतक काल मान्य होता है. उन्नाव के ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र से जानते हैं कि इस सूतक काल का समय और किन कामों को करने से बचना चाहिए.

चंद्र ग्रहण का समय

इस साल का पहला चंद्र ग्रहण 05 मई को रात 08:45 मिनट पर लगेगा. ग्रहण का समापन देर रात 01:02 बजे होगा. यह उपछाया चंद्रग्रहण होगा. इसी दिन वैशाख पूर्णिमा है. वैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा भी कहते हैं. जानकारी के अनुसार, सूर्य ग्रहण अमावस्या को और चंद्र ग्रहण पूर्णिमा तिथि को लगता है. उपछाया से पहला स्पर्श: रात 08:45 बजे, परमग्रास चंद्र ग्रहण का समय: रात 10:53 बजे और उपछाया से अंतिम स्पर्श: देर रात 01:02 बजे होगा.

चंद्र ग्रहण 2023 सूतक काल

चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण के प्रारंभ समय से 09 घंटे पहले प्रारंभ हो जाता है, लेकिन 05 मई का चंद्र ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा, इस वजह से उस दिन सूतक काल मान्य नहीं होगा. इसका अर्थ यह है कि चंद्र ग्रहण के दिन सूतक काल नहीं लगेगा.

क्या होता है सूतक काल?

ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र के मुताबिक, चंद्र ग्रहण से 09 घंटे पूर्व तक के समय को सूतक काल कहा जाता है, जबकि सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पूर्व तक का समय सूतक काल माना जाता है. हालांकि यह उपछाया चंंद्रग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. इसके चलते सूतक काल मान्य नहीं होगा. हालांकि एहतियात के तौर पर कुछ लोग इसका पालन अवश्य करते हैं.

इन कार्यों को करने से बचें

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य और चंद्रमा पर ग्रहण के समय राहु और केतु का संकट होता है, जिसमें शुभ कार्य वर्जित होते हैं. सूतक काल में घर में ही रहना उचित माना गया है. सूतक काल के दौरान खाना नहीं बनाना चाहिए. सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, वहां पूजा पाठ नहीं होता है, हालांकि आप प्रभु का नाम जप सकते हैं. सूतक काल में गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को विशेष ध्यान रखना होता है. सूतक काल में भोजन करना, सोना, कपड़े सिलने जैसे कार्यों को करने की मनाही होती है.