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राम अवतार जग्गी हत्या केस में अमित जोगी दोषी करार….. हाई कोर्ट चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बैंच ने सुनाया फैसला…. अमित जोगी को तीन हफ्ते के भीतर सरेंडर करने का आदेश…..

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हस्ताक्षर न्यूज. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड (Jaggi Murder Case) में बड़ा फैसला आया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को दोषी करार देते हुए तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है।

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यह फैसला चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने सुनाया। फैसले के बाद अमित जोगी ने कहा कि हाईकोर्ट ने उन्हें पूरी तरह से सुनवाई का अवसर दिए बिना दोषी ठहरा दिया, जो उनके लिए अप्रत्याशित है। उन्होंने कहा कि उनके साथ अन्याय हुआ है और वह इस फैसले के खिलाफ आगे कानूनी विकल्पों पर विचार करेंगे।

सुनवाई के दौरान सतीश जग्गी ने अदालत को बताया कि उनके पिता रामावतार जग्गी की हत्या एक राजनीतिक साजिश के तहत कराई गई थी।

जांच एजेंसी CBI ने अदालत में करीब 11 हजार पन्नों की चार्जशीट पेश की थी, जिसमें हत्या और साजिश से जुड़े कई साक्ष्य शामिल बताए गए। इस मामले में रायपुर की विशेष अदालत ने 31 मई 2007 को सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। इसके बाद मृतक के बेटे सतीश जग्गी ने इस फैसले को चुनौती दी थी। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां से इसे दोबारा सुनवाई के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेजा गया। अब हाईकोर्ट ने CBI की अपील स्वीकार करते हुए अमित जोगी को सरेंडर करने का आदेश दिया है।

राम अवतार जग्गी हत्या कांड का पूरा लेखा जोखा

4 जून 2003 को राजधानी रायपुर में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

हत्याकांड के बाद शुरुआती पुलिस जांच पर सवाल उठने लगे थे। इसके बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच CBI को सौंप दी थी। CBI की जांच में अमित जोगी समेत कई लोगों पर हत्या और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए थे।

इस मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। बाकी 28 आरोपियों को अदालत ने सजा सुनाई थी, जबकि अमित जोगी को उस समय बरी कर दिया गया था।

करीब दो साल पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस मामले के अन्य दोषियों की अपील खारिज करते हुए उनकी आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था। अब हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गया है।