हस्ताक्षर न्यूज. राजस्थान से आए और हम यहीं के हो गये। सौ साल पहले श्री श्रीमाल परिवार राजस्थान से महासमुंद आया। महासमुंद से कारोबार की शुरुआत आजादी मिलने के पहले शुरू की। श्रीमाल परिवार में 1942 में एक बालक का जन्म हुआ। बालक की प्रतिभा तेज और ओजस्व बचपन में ही पिता जी ने पहचान ली। बालक का नाम स्वरूप रखा। अपने नाम को चरितार्थ करते हुए स्वरूप चंद जैन ने शिक्षा, जनसेवा, सामाजिक सरोकार और राजनीति में कई आयाम स्थापित किए।

रविवार को स्वरूप चंद जैन की तीन किताबों का विमोचन हुआ। 1978 से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत करने से लेकर 1990 तक के विधायकी के सफर को स्वरूप चंद जैन ने अपनी किताब विधायकी का सफरनामा में बड़े ही अच्छे अंदाज में लिखा है। रायपुर के पूर्व सांसद और पूर्व राज्यपाल रमेश बैंस ने किताब के विमोचन के अवसर पर कहा कि मेरे और स्वरूप जैन के राजनीतिक जीवन की शुरुआत लगभग एक साथ ही शुरू हुई। मैं पार्षद बना और स्वरूप भाई हमारे मेयर थे। उसके बाद जब विधायक और सांसद का चुनाव लड़ा तो कई बार राजनीतिक प्रतिद्वंदता होते हुए भी हम दोनों के मन में खटास नहीं रही। एक बार चुनाव के बाद काउंटिंग चल रही थी। मैं बहुत थक गया था। स्वरूप भाई का घर रस्ते में पड़ा। मैं उनके घर रुक गया। उन्होंने घर पर मुझे चाय पिलाई। मेरे चेहरे को देखकर उन्होंने मेरी थकान को पहचान लिया। तत्काल एक मालिश वाले को बुलाया। उसने मेरे पैर की मालिश की। उसी वक्त किसी फोटोग्राफर ने फोटो खींच ली। अगले दिन वह फोटो अखबार में छप गई। अगर आज के दौर में ये वाक्या होता तो शायद पार्टियां नोटिस दे देती।लेकिन उस वक्त ऐसा नहीं था।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष चरण दास महंत ने स्वरूप भाई के साथ बिताई हुई यादों को बड़े ही हल्के फुल्के और चुटिले अंदाज में लोगों को बताया। उन्होंने कहा कि उनके और स्वरूप भैया के राजनीतिक कैरियर की शुरुआत 1980 से ही हुई। आज किताब विमोचन के अवसर पर 1980 मॉडल के चार लोग यहां मौजूद है। मंच पर मेरे साथ महामहिम रमेश बैंस, स्वरूप भैया और मेरे ठीक सामने मेरी बहन गंगा पोटई बैठी हुई है। गंगा बहन भी 1980 में पहली बार विधायक बनी। चरण दास महंत ने मजाक के लहजे में गुफ्तगू की। उन्होंने 80और 90 के दशक को याद करते हुए कहा कि स्वरूप भैया का कद कांग्रेस पार्टी में कितना बड़ा था। ये स्वरूप भैया की कलाकारी ही थी कि वे विद्या चरण शुक्ल, श्यामा चरण शुक्ल, अर्जुन सिंह और फिर बाद में दिग्विजय सिंह के करीब रहे। हम लोग अर्जुन सिंग गुट के थे। लेकिन भैया उस दौर में जो भी मुख्यमंत्री रहा उसके करीबी रहे। कांग्रेस पार्टी के कोषाध्यक्ष सीताराम केसरी के भी वे बहुत करीबी थे। राजनीति में ऐसा होता है कि अगर आप किसी बड़े नेता के साथ है तो आप पर उसका ठप्पा लग जाता है। मगर स्वरूप भैया कई बड़े नेताओं के करीबी रहे। मगर उन पर ठप्पा नहीं लगा। ये उनकी बहुत बड़ी कलाकारी रही।
स्वरूप चंद जैन की किताब विमोचन के अवसर पर रायपुर सहित छत्तीसगढ़ के बड़े बुद्धिजीवी वर्ग के साथ ही शिक्षाविद्, अधिकारी वर्ग, कारोबारी जगत के तमाम बड़े लोग शहर के कुछ बड़े वकील सहित लिखने पढ़ने से ताल्लुक रखने वाले तमाम चेहरे मौजूद थे।
सबसे बड़ी बात स्वरूप चंद जैन का पूरे परिवार ने उनकी तीनों किताबों के विमोचन के अवसर को ऐतिहासिक जलसे के रूप में मनाया। बहुत हर्ष और उल्लास के साथ तमाम लोगों ने स्वरूप चंद जैन को उनकी किताब के प्रकाशन और विमोचन की बधाई दी।


























