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कर्नाटक के अगले CM सिद्धारमैया होंगे, कांग्रेस ने किया तय, जानिए इसके पीछे की कहानी

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नई दिल्ली। कर्नाटक के अगले CM सिद्धारमैया होंगे। डीके शिवकुमार के पास डिप्टी CM के साथ, ऊर्जा और सिंचाई मंत्रालय और प्रदेश अध्यक्ष का पद रहेगा। उन्हें यह भी कहा गया है कि सिद्धारमैया का दो साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद अगले तीन साल के लिए कर्नाटक की कमान उन्हें सौंप दी जाएगी, लेकिन डीके अभी भी इस बात पर अड़े हुए हैं कि मुख्यमंत्री का पद मल्लिकार्जुन खड़गे को दे दिया जाए।

शपथ ग्रहण समारोह 18 मई को दोपहर 3.30 बजे होगा। इसकी तैयारी बेंगलुरु के कांटीरवा स्टेडियम में शुरू हो चुकी है। दोनों नेताओं के साथ 10 मंत्री शपथ ले सकते हैं।

CM पद को लेकर पिछले चार दिनों से बेंगलुरु से लेकर दिल्ली तक कई बैठकें हुईं। सिद्धारमैया रेस में सबसे आगे चल रहे थे। इससे पहले रविवार को भी कांग्रेस विधायक दल की बैठक में सभी MLA ने नेता चुनने के लिए खड़गे को अधिकृत किया था। इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष ने ऑब्जर्वर्स से सभी विधायकों से वन-टु-वन बात करने को कहा था। इनमें 80 से ज्यादा विधायकों ने सिद्धारमैया के फेवर में वोट किया था।

इन 2 फॉर्मूले पर बात हुई थी…

  • पहला: सिद्धारमैया को पहले ढाई साल तक CM बना दीजिए। फिर ढाई साल बाद कुर्सी डीके को दी जाए।
  • दूसरा: सिद्धारमैया को CM बना दिया जाए। डीके को PCC के चीफ के अलावा दो बड़े मंत्रालय दिए जाएं।

कर्नाटक से जुड़े दो अपडेट्स

  • सिद्धारमैया सुबह 11.15 बजे राहुल गांधी से मिलने के लिए 10 जनपथ पहुंचे। दोनों के बीच करीब एक घंटे बातचीत हुई। इस दौरान उनके साथ विधायक भी मौजूद रहे।
  • राहुल से मुलाकात के बाद सिद्धारमैया ने फोन पर सोनिया गांधी से बात की।
  • डीके शिवकुमार दोपहर 12:15 बजे राहुल से मिलने पहुंचे। दोनों की एक घंटे मीटिंग हुई। इससे पहले पार्टी के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने सोनिया गांधी से मुलाकात की थी।
  • दिल्ली कांग्रेस ऑफिस के बाहर डीके के समर्थक पोस्टर लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इनकी मांग है कि उन्हें सीएम बनाया जाए।

    डीके शिवकुमार ने मंगलवार सुबह बेंगलुरु में कहा, ‘हम सब एक हैं। हम 135 हैं। मैं किसी को डिवाइड नहीं करना चाहता। वे भले ही मुझे पसंद करें या नहीं। मैं एक जिम्मेदार व्यक्ति हूं। मैं धोखा नहीं दूंगा और ना ही ब्लैकमेल करूंगा। हमने कांग्रेस पार्टी को बनाया, हमने इस घर को बनाया। मैं इसका हिस्सा हूं।’

    उन्होंने कहा, ‘एक मां अपने बच्चे को सब कुछ देती है। सोनिया गांधी हमारी आदर्श हैं। कांग्रेस हर किसी के लिए परिवार की तरह है। हमारा संविधान बेहद महत्वपूर्ण है और हमें सभी के हितों की रक्षा करनी है। लोकसभा में 20 सीट जीतना हमारा अगला लक्ष्य है।’ 13 मई को चुनाव का परिणाम आने के बाद से अब तक कांग्रेस CM का ऐलान नहीं कर सकी

    जानिए होने वाले सीएम के बारे में 
    .राज्य के होने वाले मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के एजुकेशन क्वालिफिकेशन की बात करें तो उन्होंने मैसूर यूनिवर्सिटी से पहले बीएससी में ग्रेजुएशन किया और इसके बाद उन्होंने वकालत का पेशा चुना. वहीं सिद्धारमैया के खिलाफ कुल 13 मामले दर्ज हैं.

    कर्नाटक के होने वाले मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का जन्म मैसूर के एक गांव में तीन अगस्त 1947 को हुआ था. उनके पिता सिद्धारमे गौड़ा वरुणा होबली में खेती का काम करते थे. वहीं इनकी मां एक हाउसवाइफ थी. पांच भाई-बहनों में सिद्धारमैया दूसरे नंबर पर हैं और कुरुबा गौड़ा समुदाय से ताल्लुक रखते हैं.

    राजनीतिक करियर की बात करें तो सिद्धारमैया ने 1978 में राजनीति में कदम रखा था. इसके बाद सिद्धारमैया विभिन्न पदों पर रहे. कार्यकर्ता से लेकर विधायक और उपमुख्‍यमंत्री बनने के बाद साल 2013 में सिद्धारमैया को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया और 2013 से 2018 तक वो इस पद पर रहे. कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 में सिद्धारमैया ने ​कर्नाटक के मैसूर क्षेत्र में वरुणा सीट से जीत हासिल की है. इसके साथ ही सिद्धारमैया के खिलाफ कुल मिलाकर 13 मामले दर्ज हैं.

    क्या है सिद्धारमैया की एजुकेशन क्वालिफिकेशन?

    सिद्धारमैया की शुरुआती शिक्षा की बात करें तो दस साल की उम्र तक वो गांव के ही एक स्कूल में पढ़े. बाद में उन्होंने बीएससी की डिग्री हासिल की और फिर एलएलबी की पढ़ाई मैसूर यूनिवर्सिटी से की हालांकि सिद्धारमैया के माता-पिता चाहते थे कि वह डॉक्‍टर बनें, लेकिन उन्‍होंने वकालत के पेशे को चुना. सिद्धारमैया मैसूर के फेमस वकील चिक्काबोरैया के जूनियर थे और बाद में उन्होंने कुछ समय के लिए कानून पढ़ाया. वकालत छोड़ने के बाद सिद्धारमैया ने राजनीति में कदम रखा.

    सिद्धारमैया ही क्यों 
    अब सवाल ये उठता है कि आखिर इतनी मेहनत के बाद भी डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद से वंचित क्यों रह गए. चलिए आपको बताते हैं किन मामलों में सिद्धारमैया आगे निकल गए और सीएम पद पर एक और बार विराजमान होंगे.

    दरअसल, कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चिंता यही रही कि डीके शिवकुमार के खिलाफ कई मामले दर्ज थे. ऐसे में केंद्रीय जांच एजेंसियां उन्हें कभी भी जेल भेज सकती थीं और कर्नाटक में सरकार अस्थिर होने का डर बना रहता. शिवकुमार लंबे समय से सीएम की कुर्सी पर बैठने की इंतजार कर रहे थे. इस बार उन्होंने अपने बयानों में साफ कर दिया था कि वह मुख्यमंत्री ही बनना चाहते हैं लेकिन ईडी और सीबीआई के मामलों की वजह से उन्हें सीएम बनाना पार्टी के लिए खतरनाक साबित हो सकता था.

    पिछड़े वर्ग में सिद्धारमैया की पैठ 

    डीके शिवकुमार के मुकाबले सिद्धारमैया का पलड़ा इसलिए भारी रहा क्योंकि  उनकी पहुंच राज्य के हर तबके में है. खासतौर पर दलित, मुसलमान और पिछड़े वर्ग (अहिंदा) में सिद्धारमैया की पैठ है.  कांग्रेस को डर था कि अगर उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया जाता तो एक बड़ा वोट बैंक खत्म हो सकता था. उनका दलित, अल्पसंख्यक, आदिवासी, ओबीसी समाज में व्यापक जनाधार रहा है. वह खुद भी ओबीसी जाति से आते हैं.

    अहिन्दा’ फॉर्मूला

    सिद्धारमैया लंबे समय से अल्पसंख्यातारु (अल्पसंख्यक), हिंदूलिद्वारू (पिछड़ा वर्ग) और दलितारु (दलित वर्ग) फॉर्मूले पर काम कर रहे थे. अहिन्दा समीकरण के तहत सिद्धारमैया का फोकस राज्य की 61 प्रतिशत आबादी थी. उनका यह प्रयोग काफी चर्चाओं में रहा था और  सिद्धारमैया इस फॉर्मूले को लेकर कांग्रेस में शामिल हो गए थे. कर्नाटक में दलित, आदिवासी और मुस्लिमों की आबादी 39 फीसदी है, जबकि सिद्धारमैया की कुरबा जाति की आबादी भी 7 प्रतिशत के आसपास है. 2009 के बाद से कांग्रेस कर्नाटक में इसी समीकरण के सहारे राज्य की राजनीति में मजबूत पैठ बनाए हुई है. यही कारण है कि कांग्रेस इसे कमजोर नहीं करना चाहती है.