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लोटस और मेडलाइफ हॉस्पिटल का पंजीयन निरस्त….. स्वास्थ्य विभाग ने 17 हॉस्पिटल का निरीक्षण किया….. आयुष्मान जन आरोग्य योजना में अनेक तरह की वित्तीय गड़बड़ियों के बाद लोटस और मेडलाइफ हॉस्पिटल के पंजीयन किए निरस्त…..

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हस्ताक्षर न्यूज.

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में अनियमितताओं की जांच के लिए प्रदेश के 17 अस्पतालों का निरीक्षण किया गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) ने इन अस्पतालों को वेरी हाई रिस्क स्कोर के आधार पर चिन्हित किया था।

स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय द्वारा गठित राज्य स्तरीय जांच दल ने 30 सितंबर को इन अस्पतालों का दौरा कर आयुष्मान मरीजों के उपचार से जुड़े दस्तावेज एकत्र किए। इनका विस्तृत परीक्षण किया जाएगा और तथ्यों के आधार पर आगे कार्रवाई होगी।

छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग के अपर संचालक इंद्रजीत बर्मन ने बताया, ‘कल 17 अस्पतालों पर जांच की गई है। आयुष्मान कार्ड को लेकर भी गड़बड़ियां मिली हैं। अभी दस्तावेजों का परीक्षण किया जा रहा है। परीक्षण के बाद कार्रवाई की जाएगी।’

उन्होंने दो अस्पतालों के पंजीयन रद्द होने की पुष्टि करते हुए कहा कि मेडलाइफ और लोटस अस्पताल का पंजीयन निरस्त किया जा चुका है। बर्मन ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच आयुष्मान कार्ड के साथ-साथ बीजू स्वास्थ्य कार्ड में भी चल रही है।

जांच के दायरे में रायपुर के सात, बिलासपुर के तीन, दुर्ग के दो तथा सरगुजा, बस्तर, कबीरधाम, कोंडागांव और कोरबा के एक-एक अस्पताल शामिल हैं। इनमें प्रमुख नाम हैं:

रायपुर : श्री रावतपुरा सरकार हास्पिटल, श्री अनंत साईं हास्पिटल, श्री महावीर हास्पिटल, श्रीनिवास हास्पिटल, एसके केयर हास्पिटल, विजन सेंटर आई हास्पिटल, वरदान हास्पिटल
बिलासपुर : अशोक प्रसूति मंदिर, केयर एन क्योर मल्टीस्पेशियलिटी हास्पिटल, मेहता चिल्ड्रन नर्सिंग होम
दुर्ग : श्री शंकराचार्य इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, पल्स हास्पिटल
अन्य : बस्तर का एससीएच अस्पताल, कबीरधाम का जय जगन्नाथ हेल्थकेयर, कोंडागांव का नेताम हास्पिटल, कोरबा का हरि कृष्ण केयर हास्पिटल, सरगुजा का डीएचटी केयर हास्पिट

लोटस अस्पताल का पंजीयन निरस्त

जांच दल की अनुशंसा पर 28 और 29 सितंबर को रायपुर के मेडलाइफ सुपरस्पेशलिटी हास्पिटल और लोटस हास्पिटल एंड एडवांस यूरोलॉजी सेंटर का आयुष्मान पंजीयन निरस्त कर दिया गया।

मेडलाइफ के TMS पोर्टल पर 28 सितंबर को महज डेढ़ घंटे में 26 मरीजों के डिस्चार्ज का रिकॉर्ड मिला। जांच में एजेंटों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों से मरीजों को समूह में लाने और कमीशन देने के तथ्य सामने आए। सीएमएचओ को एफआईआर दर्ज करने और नर्सिंग होम एक्ट के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

लोटस हास्पिटल में निर्धारित राशि से अधिक वसूली की शिकायत सही पाए जाने पर पंजीयन तत्काल रद्द किया गया। विभाग की जांच जारी है। अनियमितताएं साबित होने पर और अस्पतालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।