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छठ पर्व शुरू, जानिए क्यों की जाती है सूर्य की पूजा और कौन हैं छठ माता

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Chhath Puja 2022 : 28 अक्तूबर से छठ के महापर्व की शुरुआत हो रही है। 31 अक्तूबर को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पूजा का समापन होगा।  सनातन धर्म में छठ पूजा का विशेष महत्व माना गया है। कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर नहाय-खाय से छठ पर्व का आरंभ होता है। फिर षष्ठी तिथि को मुख्य छठ व्रत करने के बाद अगले दिन सप्तमी को उगते सूरज को जल देने के बाद व्रत का समापन किया जाता है। इस व्रत में संतान की लंबी आयु, उज्ज्वल भविष्य और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। छठ का व्रत काफी कठिन  होता है, क्योंकि इसमें व्रती को 24 घंटो से अधिक समय तक निर्जला व्रत रखना होता है। इस व्रत में मुख्य रूप से सूर्य देव और छठ माता की उपासना की जाती है और उगते वह अस्त होते सूर्य को जल दिया जाता है। ऐसे में चलिए जानते हैं कि क्यों किया जाता है छठ पर सूर्य पूजन और कौन हैं छठ माता-

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कौन हैं छठी माता ?
मान्यता के अनुसार, छठ माता को ब्रह्मा की मानस पुत्री कहा जाता है। कहा जाता है कि इनकी पूजा करने से संतान प्राप्ति और संतान की लंबी उम्र की मनोकामना पूरी हो जाती है। एक अन्य मान्यता के अनुसार, इन्हें सूर्य देव की बहन भी कहा जाता है।

क्यों दिया जाता है सूर्य देव को अर्घ्य ?
पौराणिक मान्यता के अनुसार छठ पर्व का आरंभ महाभारत काल के समय में माना जाता है। कर्ण का जन्म सूर्य देव के द्वारा दिए गए वरदान के कारण कुंती के गर्भ से हुआ था। यही कारण है कर्ण सूर्य पुत्र कहलाते हैं और सूर्यनारायण की कृपा से इनको कवच व कुंडल प्राप्त हुए थे व सूर्य देव के तेज और कृपा से ही ये तेजवान व महान योद्धा बने।

कहा जाता है कि कर्ण भगवान सूर्य के परम भक्त थे और इस पर्व की शुरुआत सबसे पहले सूर्यपुत्र कर्ण ने ही सूर्य की पूजा करके की थी। कर्ण प्रतिदिन घंटों कमर तक पानी में खड़े रहकर सूर्य पूजा करते थे और उनको अर्घ्य देते थे। आज भी छठ में अर्घ्य दान की यही पद्धति प्रचलित है। इस संबंध में एक कथा और भी है कि जब पांडव अपना सारा राजपाट कौरवों से जुए में हार गए थे तब द्रौपदी ने छठ का व्रत किया था। इस व्रत से पांडवों को उनका सारा राजपाट वापस मिल गया था।

सूर्य को अर्घ्य देने का है विशेष महत्व
सूर्य को जीवन का आधार माना जाता है। रोजाना उगते सूर्य को जल देने से सेहत भी ठीक रहती है। जीवन में जल और सूर्य की महत्ता को देखते हुए छठ पर्व पर सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके अलावा सूर्य को जल देने का ज्योतिष महत्व भी माना जाता है। भगवान सूर्य नारायण की कृपा से व्यक्ति को तेज व मान-सम्मान की प्राप्ति होती है।