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पाठ्य पुस्तक निगम के पूर्व जीएम अशोक चतुर्वेदी गिरफ्तार, आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार के कई मामले हैं दर्ज

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रायपुर। छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम के पूर्व जीएम अशोक चतुर्वेदी को एसीबी ईओडब्ल्यू की टीम ने गिरफ्तार किया है। खबरों के अनुसार एसीबी ईओडब्ल्यू की टीम ने पाठ्य पुस्तक निगम के पूर्व जीएम चतुर्वेदी को देर रात आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले से गिरफ्तार किया है। बतादें कि अशोक चतुर्वेदी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार के कई मामले दर्ज हैं। कोर्ट में जमानत खारिज होने के बाद से फरार चल रहे थे। एसीबी की टीम उन्‍हें गिरफ्तार कर आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले से रायपुर के लिए लेकर निकल चुकी है।

ईओडब्ल्यू एसीबी की टीम ने गुंटूर के एक होटल से पकड़ा

छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम के पूर्व जनरल मैनेजर अशोक चतुर्वेदी को ईओडब्ल्यू ने गिरफ्तार कर लिया है। आंध्र प्रदेश के गुंटूर के एक होटल से देर रात पकड़ा गया है। चतुर्वेदी पंचायत विभाग के अधिकारी हैं और पाठ्य पुस्तक निगम में प्रतिनियुक्ति पर थे।

अशोक चतुर्वेदी की कल होगी कोर्ट में पेशी

बता दें कि चतुर्वेदी पर आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज है। उन्हें हाईकोर्ट से राहत मिली थी। कुछ दिन पहले ही यह निरस्त कर दी गई है। इसके बाद ईओडब्ल्यू एसीबी की टीम ने पतासाजी शुरू की और गुंटूर में लोकेशन मिलने पर यहां से टीम भेजी गई। ईओडब्ल्यू के डायरेक्टर जनरल डीएम अवस्थी ने कहा कि चतुर्वेदी को हिरासत में ले लिया गया है और टीम रायपुर के लिए निकल गई है। कल कोर्ट में पेश किया जाएगा।

टेंडर प्रक्रियाओं में करोड़ों की जालसाजी मामले में एफआईआर

छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम के पूर्व महाप्रबंधक अशोक चतुर्वेदी के खिलाफ आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ईओडब्ल्यू ने एफआईआर दर्ज की। टेंडर प्रक्रियाओं में जालसाजी कर करोड़ों रुपये की अनियमितता के मामले में एफआईआर कराई गई। नवंबर 2019 में राज्य शासन ने पाठ्यपुस्तक निगम से चतुर्वेदी की प्रतिनियुक्ति खत्म करते हुए उनकी सेवाएं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को लौटा दी थी। इस निर्णय के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट से स्टे ले लिया था। टेंडर में हुई अनियमितता की शिकायत के बीच जांच का जिम्मा एसीबी-ईओडब्ल्यू को सौंपा गया था।

अधिकारियों ने बताया कि होप इंटरप्राइजेज को अकेले को काम देने के लिए और लाभ पहुंचाने के लिए अशोक चतुर्वेदी और कमेटी के सभी सदस्यों ने कपटपूर्वक, जालसाजी से तैयार और झूठी निविदाओं पर फैसला लिया और होप इंटरप्राइजेज को करोड़ों रुपये का ठेका दिया गया। उन्होंने बताया कि इस टेंडर में चार आवेदक बताए गए हैं, लेकिन जांच में साबित हुआ कि होप इंटरप्राइजेज को काम देने के लिए बाकी फर्मों के नाम से झूठी निविदाएं पेश की गईं। जिनमें कागजात भी जालसाजी से बनाए गए।

नकली बिजली बिल बनाए गए। बिजली बिल छाप लिए गए, निविदाकारों की ओर से दस्तखत भी नहीं किए गए। और इन फर्मों की तरफ से जो ईएमडी और बैंक ड्रॉफ्ट लगाए गए वे भी होप इंटरप्राइजेज के कर्मचारी बृजेन्द्र तिवारी के द्वारा पेश किए गए।