छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पिछले करीब एक दशक से झीरम में कांग्रेस पार्टी के नेताओं के नरसंहार को लेकर भाजपा पर इसलिए हमलावर है, क्योंकि यह हत्याकांड भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुआ था। जाहिर है, प्रवक्ताओं से पार्टी यह उम्मीद तो करती ही है कि झीरम पर बातें इसी लाइन में की जाएंगी। लेकिन पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता और अक्सर चर्चा में रहने वाले विकास तिवारी ने कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व मंत्री कवासी लखमा का नाम लेकर झीरम न्यायिक आयोग के सामने यह मांग उठा दी कि सच का पता लगाने के लिए इनका नार्को टेस्ट करवाया जाए।
प्रदेश कांग्रेस को यह काफी नागवार गुजरा है और प्रवक्ता को तुरंत पद से हटा दिया है। यही नहीं, नोटिस भेजकर तीन दिन में जवाब मांगा गया है और सूत्रों के मुताबिक प्रवक्ता तिवारी को पार्टी से निकाला भी जा सकता है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने प्रवक्ता को नोटिस भेजा है। इसमें कहा गया है कि विकास जैसे वरिष्ठ प्रवक्ता से अपेक्षा थी कि वे पार्टीलाइन पर बयान दें। लेकिन उन्होंने वरिष्ठ नेताओं के नाम से मीडिया में बयानबाजी की है, जो गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में है। पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर प्रभारी महामंत्री मलकीत गैंदू ने इसी बात पर तिवारी को तुरंत प्रवक्ता पद से हटाया ही है, यह नोटिस भी भेजा है कि इस बारे में तीन दिन में लिखित तौर पर प्रदेश कांग्रेस को स्पष्टीकरण सौंपना होगा। पार्टी नेताओं ने स्पष्ट किया है कि झीरम घाटी की घटना भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में हुई थी और उसकी राजनीतिक व नैतिक जिम्मेदारी तत्कालीन भाजपा सरकार पर ही बनती है। इस मामले में कांग्रेस लगातार पीड़ित परिवारों और जनता के साथ खड़ी होकर सच्चाई सामने लाने की लड़ाई लड़ रही है।