हस्ताक्षर न्यूज.
अगर आपने होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन लिया है, तो आपकी मासिक किस्त (EMI) बढ़ने वाली है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो रेट में 0.25% (25 बेसिस पॉइंट्स) की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है।
अक्टूबर 2026 की बैठक के बाद आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि रेपो रेट को 5.25% से बढ़ाकर 5.50% कर दिया गया है।
देश में महंगाई पर लगाम लगाने के लिए रिजर्व बैंक ने लगभग 4 साल के लंबे अंतराल के बाद यह कदम उठाया है। इससे पहले फरवरी 2023 में रेपो रेट बढ़ाया गया था।
दरों में इजाफा: रेपो रेट में 0.25% की बढ़ोतरी, अब नई दर 5.50% हुई।
महंगाई पर ध्यान: कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतों और खाद्य वस्तुओं के महंगे होने के जोखिम को देखते हुए यह फैसला लिया गया।
GDP अनुमान में सुधार: वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आर्थिक विकास दर (GDP) का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया गया है।
महंगाई का नया अनुमान: वर्ष 2026-2027 के लिए महंगाई दर का अनुमान भी 5.0% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया गया है।
जब आरबीआई रेपो रेट बढ़ाता है, तो बैंकों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है। इसके चलते बैंक ग्राहकों के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर देते हैं।
यदि आपने फ्लोटिंग रेट (Floating Rate) पर लोन लिया है, तो ब्याज दरें 0.25% बढ़ जाएंगी –
- 20 साल की अवधि का ₹50 लाख का होम लोन:
पुराना ब्याज दर (मान लें): 7.50% → पुरानी EMI: ₹40,280
नया ब्याज दर: 7.75% → नयी EMI: ₹41,057
असर: हर महीने लगभग ₹777 की बढ़ोतरी। - 25 साल की अवधि का ₹50 लाख का होम लोन:
पहले 7.50% की दर से EMI ₹36,950 जाती थी, जो अब बढ़कर ₹37,766 हो जाएगी।
होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें बढ़ेंगी, जिससे नए व पुराने कर्जदारों पर मासिक बोझ बढ़ेगा, जमाकर्ताओं (Depositers) के लिए यह राहत भरी खबर है। रेपो रेट बढ़ने से बैंक अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) दरों में भी इजाफा करेंगे, जिससे बचत पर अधिक ब्याज मिलेगा। विशेषज्ञों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के अनुसार, त्योहारी सीजन के दौरान घर खरीदने वालों की मांग बनी रहेगी। हालांकि ब्याज दरों का कुछ असर पड़ सकता है, लेकिन लंबी अवधि के निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार के कारण बाजार में सकारात्मक रुझान रहने की उम्मीद है।
- रेपो रेट क्या है?
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर देश का केंद्रीय बैंक (RBI) वाणिज्यिक बैंकों को कम समय के लिए कर्ज देता है। इसी के आधार पर बैंक ग्राहकों के लोन की ब्याज दरें तय करते हैं। - आरबीआई ने दरें क्यों बढ़ाईं?
वैश्विक आर्थिक दबाव, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और मौसम की अनिश्चितता के कारण खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ रही हैं। बाजार में मांग को नियंत्रित कर महंगाई को काबू में रखने के लिए यह कड़ा रुख अपनाया गया है। - इससे आप पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
अगर आप लोन ले रहे हैं या पहले से लोन चल रहा है, तो आपकी जेब पर अतिरिक्त भार पड़ेगा। हालांकि, आपकी बचत और एफडी पर ज्यादा रिटर्न मिलेगा। - आगे दरें कब घट सकती हैं?
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति हर दो महीने में समीक्षा करती है। यदि आने वाले महीनों में महंगाई दर स्थिर होती है और आर्थिक स्थिति अनुकूल रहती है, तो आरबीआई भविष्य में दरों में कटौती पर विचार कर सकता है।




























