हस्ताक्षर न्यूज.
छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, रायपुर ने अंबुजा सिटी सेंटर मॉल प्रबंधन की अपील खारिज करते हुए मॉल और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में नि:शुल्क पार्किंग (Free Parking) के रायपुर जिला उपभोक्ता फोरम के आदेश को बरकरार रखा है।
रायपुर जिला उपभोक्ता फोरम ने मॉल में आने वाले दोपहिया और चारपहिया वाहनों से पार्किंग शुल्क वसूली को अवैध मानते हुए निशुल्क पार्किंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था। इस फैसले के खिलाफ अंबुजा मॉल प्रबंधन ने राज्य आयोग में अपील दायर की थी, जिसे खारिज कर दी गई है।
मामले में अधिवक्ता अंजिनेश अंजय शुक्ला स्वयं परिवादी के रूप में पैरवी कर रहे थे। जिला आयोग के समक्ष उन्होंने मॉल में पार्किंग शुल्क वसूली को चुनौती दी थी।
इस फैसले का मतलब हुआ कि फ्लोर स्पेस इंडेक्स यानी कि FSI का लाभ लेने वाले सभी मॉल और कर्मशियल कॉम्प्लेक्स में अब पार्किंग नि:शुल्क है।
यह मामला उच्च न्यायालय अधिवक्ता अंजिनेश अंजय शुक्ला की ओर से दायर उपभोक्ता परिवाद से शुरू हुआ था। जिला आयोग के 22 अप्रैल 2026 के आदेश के खिलाफ अंबुजा सिटी सेंटर मॉल प्रबंधन ने राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील दाखिल की थी। आयोग ने सुनवाई के बाद मॉल की अपील को खारिज कर दिया।
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद अंबुजा मॉल की अपील को खारिज कर दिया। पीठ में अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम चौरड़िया और सदस्य प्रमोद कुमार वर्मा शामिल थे।
आयोग ने जिला आयोग के आदेश को बरकरार रखते हुए मॉल में आने वाले उपभोक्ताओं के लिए निशुल्क पार्किंग के निर्देश को कायम रखा।
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अंजिनेश अंजय शुक्ला की ओर से राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (NCDRC) और विभिन्न उच्च न्यायालयों के पूर्व फैसलों का हवाला दिया गया।
उनकी दलील थी कि मॉल प्रबंधन दुकानों से सुरक्षा, बिजली, एस्केलेटर सहित विभिन्न सुविधाओं के लिए मेंटेनेंस शुल्क प्राप्त करता है। ऐसे में मॉल में आने वाले आम उपभोक्ताओं और कर्मचारियों से अलग से पार्किंग शुल्क की वसूली का औचित्य नहीं है।
राज्य आयोग ने अपने आदेश में पार्किंग शुल्क की वसूली को ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ और ‘सेवा में कमी’ के दायरे में माना।
मामले में निजी संपत्ति पर FASTag के जरिए स्वचालित शुल्क वसूली का मुद्दा भी उठा। आयोग के समक्ष यह तर्क रखा गया कि मॉल प्रबंधन को निजी परिसर में इस तरह स्वचालित टोल जैसी वसूली करने का अधिकार प्राप्त नहीं है।
राज्य आयोग के आदेश में इस पहलू पर भी टिप्पणी की गई है।
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू भवन निर्माण नियमों के तहत पार्किंग के लिए मिलने वाली FSI छूट से जुड़ा है।
परिवादी की ओर से दलील दी गई कि यदि किसी व्यावसायिक भवन को पार्किंग के लिए निर्धारित स्थान पर FSI का लाभ मिलता है, तो उस सुविधा को लेकर आम उपभोक्ताओं से अलग से शुल्क वसूलने का सवाल उठता है।
राज्य आयोग के फैसले के बाद यह कानूनी सिद्धांत सामने आया है कि पार्किंग के लिए FSI से संबंधित नियामकीय लाभ लेने वाले व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में पार्किंग शुल्क वसूली पर उपभोक्ता कानून के तहत सवाल उठाया जा सकता है।
फैसले के बाद अधिवक्ता अंजिनेश अंजय शुक्ला ने इसे उपभोक्ता अधिकारों की दिशा में बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि मॉल में आने वाले उपभोक्ताओं से पार्किंग के नाम पर शुल्क वसूली के खिलाफ उनकी कानूनी लड़ाई अब राज्य आयोग तक पहुंची और आयोग ने जिला आयोग के निशुल्क पार्किंग के आदेश को बरकरार रखा है।
राज्य आयोग के इस फैसले के बाद अब प्रदेश के अन्य मॉल और व्यावसायिक परिसरों में पार्किंग शुल्क वसूली को लेकर भी इस आदेश का हवाला देकर उपभोक्ता आयोगों में चुनौती दी जा सकती है।




























