हस्ताक्षर न्यूज.
केंद्र सरकार के तमाम दावों और सेना के इस्तेमाल के बावजूद RE- NEET में भारी घोटाले का मामला सामने आया है। रविवार को नीट यूजी परीक्षा में बिहार पुलिस ने सॉल्वर गैंग का खुलासा किया है और लगभग ४० लोगों की गिरफ्तारी की है।
इस मामले के पर्दाफाश के एक दिन बाद पुलिस की जांच में लगातार नई कड़ियां जुड़ रही हैं। पूछताछ में सामने आया है कि गिरोह ने पूरी साजिश को अंजाम देने के लिए परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन व्यवस्था में ही सेंध लगा दी थी। बायोमेट्रिक जांच से जुड़े कर्मियों की मिलीभगत से फर्जी परीक्षार्थियों को वास्तविक अभ्यर्थियों के स्थान पर परीक्षा केंद्र के अंदर प्रवेश दिलाया गया था।
सूत्रों के अनुसार अब तक की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि पावापुरी मेडिकल कॉलेज, राजगीर का छात्र रविशंकर इस नेटवर्क का मुख्य संचालक था। उसने विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे छात्रों को सॉल्वर के रूप में तैयार कर परीक्षा में बैठाने की योजना बनाई थी।गिरोह ने ऐसे अभ्यर्थियों को तलाशा, जो मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए किसी भी कीमत पर सफल होना चाहते थे।
जांच में सामने आया है कि पटना मेडिकल कॉलेज के चतुर्थ वर्ष के छात्र एवं हाजीपुर निवासी मयंक कश्यप ने अंकित कुमार की पहचान पर बायोमेट्रिक स्टाफ के रूप में काम किया। आरोप है कि इसी माध्यम से गिरोह ने बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया को प्रभावित किया और सॉल्वरों को केंद्र के भीतर प्रवेश दिलाने में सफलता हासिल की। इसके बाद फर्जी परीक्षार्थी वास्तविक अभ्यर्थियों के स्थान पर परीक्षा में शामिल हुए।
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए नौ सॉल्वर सभी मेडिकल छात्र बताए जा रहे हैं। इनके अलावा बायोमेट्रिक एजेंसी से जुड़े कर्मियों और गिरोह के अन्य सदस्यों समेत कुल 40 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार लोगों में एक मूल परीक्षार्थी भी शामिल है। पुलिस कुछ अन्य संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
लखीसराय के एसडीपीओ शिवम कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में प्रत्येक अभ्यर्थी से 10 से 12 लाख रुपये में सौदा तय होने की जानकारी मिली है। इसमें एक से दो लाख रुपये अग्रिम लिए गए थे, जबकि शेष राशि परीक्षा में सफलता और नामांकन के बाद भुगतान की जानी थी।






























