हस्ताक्षर न्यूज.
कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रहे सस्पेंस का आज अंत हो गया। मौजूदा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया दोपहर 3 बजे इस्तीफा देने वाले हैं। उनके बाद उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार नई सरकार की कमान संभालेंगे। कांग्रेस रोटेशन पॉलिसी के तहत कर रही है बदलाव। छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस की सरकार के समय रोटेशन पॉलिसी के तहत बदलाव की काफी चर्चा रही। मगर कांग्रेस आला कमान यहां फैसला नहीं ले पाई। लेकिन कर्नाटक में पार्टी ने फैसला ले लिया।
सिद्धारमैया आज दोपहर 3 बजे राज्यपाल के कार्यालय में इस्तीफा सौंपेंगे। राज्यपाल थावरचंद गहलोत पारिवारिक कारणों से बेंगलुरु से बाहर हैं, लेकिन नियमों के अनुसार मुख्यमंत्री इस्तीफा राजभवन के अधिकारियों को लिखित रूप में दे सकते हैं। इस्तीफा स्वीकार होने तक सिद्धारमैया पद पर बने रहेंगे। आज सुबह सिद्धारमैया के आवास पर दोनों नेताओं के बीच ब्रेकफास्ट मीटिंग हुई। इस दौरान डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया के पैर छुए और दोनों ने एक-दूसरे को गले लगा लिया।
रोटेशन पॉलिसी के तहत हो रहा बदलाव
कांग्रेस में यह बदलाव अनायास नहीं हुआ है। मुख्य वजहें ये हैं – रोटेशन फॉर्मूला। 2023 विधानसभा चुनाव के बाद सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दोनों सीएम पद के दावेदार थे। राहुल गांधी के फैसले से 2.5-2.5 साल का रोटेशन तय हुआ था। नवंबर 2025 में यह अवधि पूरी हो चुकी थी।
कुछ घोटाले भी वजह
सिद्धारमैया सरकार वाल्मीकि डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन घोटाले जैसे मामलों में घिरी रही। इससे सरकार की छवि प्रभावित हुई। इधर पार्टी हाईकमान का मानना है कि समय पर नेतृत्व बदलने से मंत्रियों के खिलाफ नाराजगी को रोका जा सकता है और 2028 के चुनावों के लिए नई शुरुआत मिलेगी। 26 मई को दोनों नेता दिल्ली गए थे। वहां कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के साथ लंबी बैठक हुई, जिसमें यह फैसला पक्का हुआ।
कल डीके शिवकुमार को कांग्रेस विधायक दल का नेता चुना जाएगा। फिर वे राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। मंत्रिमंडल में बड़ा बदलाव संभव है। 35 मंत्रियों में से करीब 25 बदले जा सकते हैं।
15-20 नए चेहरे शामिल हो सकते हैं।
दो डिप्टी सीएम बनाए जाने की चर्चा
एक दलित चेहरे को और दूसरा लिंगायत या ओबीसी समुदाय से। सिद्धारमैया के बेटे को भी मंत्री बनाए जाने की संभावना है, जैसा बिहार में नीतीश कुमार के बेटे के साथ हुआ।
कर्नाटक कांग्रेस में यह बदलाव 2023 से ही चर्चा में था। डीके शिवकुमार के समर्थक लगातार 2.5 साल वाली डील की बात करते रहे। अब पार्टी हाईकमान ने आखिरी फैसला ले लिया है।





























