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नेशनल हेरॉल्ड और मनी लॉन्ड्रिंग केस से सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी को हाई कोर्ट से बड़ी राहत…. कोर्ट ने ईडी की शिकायत को संज्ञान में ही नहीं लिया, कहा किसी तरह का कोई केस ही नहीं बनता…. बिना एफआईआर के ईडी ने केस दर्ज कर दिया….. कांग्रेस ने कहा राजनीतिक द्वेष की पराकाष्ठा….

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हस्ताक्षर न्यूज. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मंगलवार को नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य आरोपियों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया।

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स्पेशल जज विशाल गोगने ने कहा कि यह मामला किसी FIR पर आधारित नहीं है बल्कि एक निजी शिकायत से शुरू हुआ है। इसलिए PMLA कानून के तहत ED की यह शिकायत सुनवाई के योग्य नहीं है। कोर्ट ने हालांकि ED को जांच जारी रखने की इजाजत दी है। गांधी परिवार के अलावा, सुमन दुबे, सैम पित्रोदा, यंग इंडियन, डोटेक्स मर्चेंडाइज और सुनील भंडारी को भी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा आरोपी बनाया गया था।

यह मामला 2012 में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की निजी शिकायत से शुरू हुआ था। स्वामी ने आरोप लगाया कि सोनिया, राहुल और अन्य कांग्रेस नेताओं ने नेशनल हेराल्ड अखबार प्रकाशित करने वाली कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की करीब 2000 करोड़ रुपये की संपत्तियों को यंग इंडियन नाम की संस्था के जरिए गलत तरीके से हड़प लिया। यंग इंडियन में गांधी परिवार की बड़ी हिस्सेदारी है। आरोप था कि 2000 करोड़ की संपत्ति को महज 50 लाख रुपये में हासिल कर लिया गया। ED ने 2022 में इस मामले में सोनिया और राहुल से लंबी पूछताछ भी की थी।

कांग्रेस का कहना है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है, जबकि ईडी का दावा है कि यह मामला जालसाजी और मनी लॉन्ड्रिंग के सबूतों के साथ एक गंभीर आर्थिक अपराध है। ईडी ने आरोप लगाया है कि एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड की 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों पर अवैध रूप से कब्जा किया गया था।इस बीच जानकारी मिल रही है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) राउज़ एवेन्यू कोर्ट द्वारा पारित आदेश के खिलाफ अपील कर सकता है। उनकी कानूनी टीम राउज़ एवेन्यू कोर्ट द्वारा दिए गए विस्तृत फैसले का मूल्यांकन करेगी। ईडी इस विशेष आदेश को चुनौती देने के लिए नई अपील तैयार करेगी।

एक्स पर एक पोस्ट में इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने कहा है, ‘सत्य की जीत हुई है।’इसमें आगे कहा गया है कि “मोदी सरकार की दुर्भावनापूर्ण और अवैध कार्रवाइयां पूरी तरह से उजागर हो गई हैं। माननीय न्यायालय ने यंग इंडियन मामले में कांग्रेस नेतृत्व – श्रीमती सोनिया गांधी जी और श्री राहुल गांधी जी – के खिलाफ ईडी की कार्रवाई को गैरकानूनी और द्वेषपूर्ण पाया है। न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि ईडी का मामला उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है, क्योंकि इसमें कोई एफआईआर नहीं है, जिसके बिना कोई मामला बनता ही नहीं है।”पिछले एक दशक में मोदी सरकार द्वारा मुख्य विपक्षी दल के खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध और बदले की भावना से प्रेरित होकर की गई यह कार्रवाई आज पूरे देश के सामने उजागर हो गई है।कांग्रेस ने आगे कहा, “कोई मनी लॉन्ड्रिंग का मामला नहीं, अपराध से प्राप्त धन का मामला नहीं, और संपत्ति का कोई हस्तांतरण नहीं—ये सभी निराधार आरोप हैं जो छोटी राजनीति, नफरत की भावना और मानहानि के इरादे से लगाए गए हैं—जिन्हें आज पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया है। कांग्रेस पार्टी और हमारा नेतृत्व सत्य और प्रत्येक भारतीय के अधिकारों के लिए लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है—हम किसी से डरने वाले नहीं हैं—क्योंकि हम सत्य के लिए लड़ते हैं।”

इस बीच, कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंहवी ने नेशनल हेराल्ड मामले पर कहा, “जब मैंने इस मामले की पैरवी शुरू की… तो मैंने अदालत से कहा था कि यह एक बहुत ही अजीब मामला है, जहां पैसों का एक मिलीमीटर भी लेन-देन नहीं हुआ है, अचल संपत्ति का एक मिलीमीटर भी लेन-देन नहीं हुआ है, सारी संपत्तियां एजेएल के पास ही हैं और मनी लॉन्ड्रिंग हो रही है… एजेएल का 90 प्रतिशत हिस्सा अब यंग इंडिया नामक एक अन्य कंपनी के पास है – बस यही हुआ है। यह मामला संज्ञान लेने लायक नहीं है और यहां आप देख सकते हैं कि भाजपा ने कितना हंगामा खड़ा कर दिया है।उन्होंने अतिशयोक्ति का ढांचा बना दिया है।” कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि गैंग्स ऑफ़ गांधीनगर की करतूतें बेपर्दा हो गई हैं। उनकी कोशिश थी कि इस बहाने राहुल गांधी को घेरा जाये।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग का मामला तभी चल सकता है जब मूल अपराध की FIR दर्ज हो। यहां दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने पहले ही FIR दर्ज की है, लेकिन ED की शिकायत निजी आधार पर है। ऐसे में अभी ED की दलीलों पर फैसला करना जल्दबाजी होगी। इस फैसले से सोनिया, राहुल के अलावा सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और यंग इंडियन जैसी संस्थाओं को भी राहत मिली है। ED ने पहले 661 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क करने का नोटिस भी जारी किया था। जांच आगे भी जारी रह सकती है।