हस्ताक्षर न्यूज. छत्तीसगढ़ के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विश्वरंजन Vishwaranjan का निधन हो गया है। उन्होंने 8 मार्च 2025 को शनिवार की रात पटना के मेदांता अस्पताल में अंतिम सांस ली।

वे काफी समय से हृदय रोग से जूझ रहे थे। पिछले महीने उनकी तबीयत अचानक बहुत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें पटना में भर्ती कराया गया था। वहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने उनका इलाज किया, लेकिन हालत सुधरने की बजाय और खराब हो गई और अस्पताल में ही उनका निधन हो गया।
विश्वरंजन 1973 बैच के आईपीएस अधिकारी थे। उनका जन्म 1 अप्रैल 1952 को बिहार के गया में हुआ था। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से पढ़ाई की। मध्य प्रदेश के बंटवारे के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर मिला, लेकिन 2007 से पहले वे यहां तैनात नहीं थे। वे छत्तीसगढ़ के छठे डीजीपी बने। वर्ष 2007 में तत्कालीन डीजीपी ओपी राठौर के निधन के बाद उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने लगभग चार साल (2007 से 2011 तक) राज्य पुलिस की कमान संभाली। अपने कार्यकाल में उन्होंने पुलिस विभाग में कई अहम बदलाव किए।
कानून-व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया और नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए खास प्रयास किए। वे ‘ग्रीन हंट’ नीति के मुख्य निर्माता माने जाते थे, जिसके तहत नक्सलियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाए गए।
लंबी और ईमानदार सेवा के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक समेत कई सम्मान मिले। सेवानिवृत्त होने के बाद वे चित्रकला और फोटोग्राफी में रुचि लेने लगे। उन्होंने प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान की स्थापना की, जो छत्तीसगढ़ में साहित्य, संस्कृति और कला से जुड़ी गतिविधियों का एक बड़ा केंद्र बन गया। उनके निधन की खबर से छत्तीसगढ़ पुलिस, प्रशासन और साहित्यिक जगत में गहरा शोक है।



























