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खबरों की खोती हुई विश्वसनीयता पर निरंतर पहल के चिंतन समारोह ने पत्रकारिता को दिखाया आइना…..नए और पुराने पत्रकारों के साथ समाज के बुद्धिजीवी हुए एकत्र…. चिंतन से चिंतित दिखा एक पढ़ाकू तबका…….

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विश्वसनीय पत्रकारिता, सामाजिक समावेशिता और वैचारिक गरिमा का संगम रहा ‘निरंतर पहल’ का स्थापना दिवस समारोह

हस्ताक्षर न्यूज.

रविवार 11 अक्टूबर को रायपुर के वृंदावन हॉल में ‘निरंतर पहल’ पत्रिका का छठवां स्थापना दिवस एक गरिमामय एवं विचारोत्तेजक समारोह के रूप में मनाया गया। पत्रिका के संपादक समीर दीवान जी के कुशल संयोजन में आयोजित इस कार्यक्रम में पत्रकारिता की विश्वसनीयता, सामाजिक उत्तरदायित्व और समानता जैसे समसामयिक विषयों पर सार्थक विमर्श हुआ।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि नई दिल्ली की वरिष्ठ पत्रकार  नगमा सहर थीं। विशिष्ट अतिथि के रूप में लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार रतन मणि लाल उपस्थित थे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ के पूर्व निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुशील त्रिवेदी ने की।

इस अवसर पर ‘खबरों की विश्वसनीयता यानी भरोसा… और मेरे लिए इसके क्या मायने हैं’ विषय पर एक महत्वपूर्ण विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में महिलाओं एवं ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए अवसरों और समानता के प्रश्न पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि ट्रांसजेंडर होना कोई बीमारी नहीं है और न ही यह समुदाय समाज से अलग है। वे भी इसी समाज का अभिन्न हिस्सा हैं तथा उन्हें भी सम्मान, समान अवसर और समान अधिकारों के साथ जीवन जीने का पूरा हक है। एक संवेदनशील और समावेशी समाज की पहचान यही है कि वह प्रत्येक व्यक्ति को उसकी पहचान से परे मानवीय गरिमा और बराबरी का स्थान दे।

पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि भरोसा कोई एक दिन में अर्जित होने वाली उपलब्धि नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, निष्पक्षता, लगन और अपने काम के प्रति प्रतिबद्धता से हासिल होने वाली पूंजी है। पत्रकारिता में यह भरोसा और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि समाज समाचारों के माध्यम से घटनाओं को समझता है और अपनी राय बनाता है।

समाचारों में जवाबदेही के प्रश्न पर भी महत्वपूर्ण बातें सामने आयी। वक्ताओं का मानना था कि अब केवल ‘सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार’ अथवा ‘सूत्रों ने बताया कि’ जैसे वाक्यांशों के पीछे छिपकर अपनी जिम्मेदारी से बचना उचित नहीं है। समाचार माध्यमों की विश्वसनीयता तभी कायम रह सकती है, जब पाठक को यह भरोसा हो कि खबर तथ्यों पर आधारित है और उसे प्रस्तुत करने वाला पत्रकार अपनी बात के लिए जिम्मेदार है।

समीर दीवान के आयोजनों की एक विशिष्ट पहचान है, उनकी गरिमा, विषयों की गंभीरता और अतिथियों का चयन। चाहे अपने पिता स्वर्गीय श्री बसंत दीवान जी की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम हों अथवा ‘निरंतर पहल’ से जुड़े आयोजन, वे हर बार ऐसा मंच तैयार करते हैं, जहां विचारों की गुणवत्ता और उपस्थित लोगों की प्रतिष्ठा आयोजन को विशेष ऊंचाई प्रदान करती है। मंच पर विराजमान वक्ताओं से लेकर श्रोताओं तक, समाज के प्रबुद्ध, प्रतिष्ठित और अपने-अपने क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाले लोगों की उपस्थिति इन आयोजनों को विशिष्ट बनाती है।

इस समारोह में भी यही परंपरा दिखाई दी। यहां केवल स्थापना दिवस मनाने की औपचारिकता नहीं थी, बल्कि पत्रकारिता के मूल्यों पर आत्ममंथन करने और सामाजिक समानता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने का अवसर भी था। ऐसे आयोजन समाज में स्वस्थ संवाद की संस्कृति को मजबूत करते हैं और पत्रकारिता के प्रति लोगों के विश्वास को बनाए रखने की आवश्यकता का स्मरण कराते हैं। कार्यक्रम का कुशल एवं प्रभावशाली संचालन स्मिता शर्मा जी ने किया।

‘निरंतर पहल’ के छठवें स्थापना दिवस पर समीर दीवान जी एवं उनकी पूरी टीम को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। उम्मीद है कि पत्रिका भविष्य में भी अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता, सामाजिक सरोकारों और पत्रकारिता की विश्वसनीयता को केंद्र में रखकर निरंतर नए प्रतिमान स्थापित करेगी।