तीन लाशों के 407 टुकड़े! आफताब-श्रद्धा की कहानी से भी ज्यादा खौफनाक हैं देश के ये हत्याकांड

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पहले प्यार की कसमें, फिर शादी के वादे और अब ऐसी मौत कि सुनने वाले की रूह कांप जाए। कई राक्षस, हैवान, पिशाचों की कहानी आपने सुनी होंगी, लेकिन कई बार ऐसी हकीकत सामने आती है जो नरपिशाच की कहानियों से भी ज्यादा भयानक होती है। ऐसी हकीकत जिसे सुनकर ही रोंगटे खड़े हो जाएं। देश की राजधानी दिल्ली में आज ऐसा ही हुआ। उसने पहले अपनी प्रेमिका से प्यार का नाटक किया। उसका विश्वास जीता और फिर एक दिन मौत के घाट उतार दिया, लेकिन उसकी हैवानियत यहां भी खत्म नहीं हुई। कत्ल के बाद उसने उसकी लाश के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। एक, दो या चार-पांच टुकड़े नहीं, पैंतीस टुकड़ों में उसने अपनी गर्लफ्रेंड को काट डाला।

श्रद्धा-आफताब की लव से मर्डर तक की कहानी
ये कहानी है महाराष्ट्र के पालघर की रहने वाली श्रद्धा और उसके बॉयफ्रेंड आफताब की। श्रद्धा और आफताब की जान-पहचान मुंबई में हुई। दोनों में प्यार हुआ। श्रद्धा के परिवारवालों को ये बात पसंद नहीं आई तो दोनों मुंबई से दिल्ली आ गए। पहले मुंबई और फिर दिल्ली, कुल दो साल दोनों लिव-इन में रहे। दोनों ने दिल्ली के महरौली में एक फ्लैट ले रखा था। पहले तो प्यार की खुमारी में कुछ नहीं दिख रहा था, लेकिन वक्त के बाद श्रद्धा अपने बॉयफ्रेंड पर शादी का दबाव बनाने लगी। करी छह महीने पहले 18 मई को भी श्रद्धा ने शादी करने की जिद्द ठानी। फिर क्या था- आफताब का पारा चढ़ गया। दोनों में बकझक हुई और थोड़ी देर में ही आफताब ने हैवानियत की हद पार कर दी। उसने श्रद्धा का गला दबा दिया और उसकी जान ले ली। जिस फ्लैट में वो रह रहे थे उसी फ्लैट में अब आफताब के साथ श्रद्धा की लाश थी। आफताब ने हत्या के बाद 300 लिटर का फ्रिज खरीदकर लाया और शव के 35 टुकड़े करके उसमें भर दिए। फिर उसने धीरे-धीरे सारे टुकड़े पास के जंगल में फेंक दिया। उसके बाद जो हुआ, वो मीडिया की सुर्खियां बनी हुई हैं।

पहले भी हुए कई ऐसे मामले
हैवानियत भरी ऐसी कई घटनाएं देश में पहले भी घट चुकी हैं। वर्ष 2010 में भी ठीक ऐसा ही एक मामला सामने आया जिसने पूरे देश को दहला दिया था। जिसने न सिर्फ प्यार को शर्मसार किया बल्कि हैवानियत की भी सारी हदें पार कर दीं। विदेश से पढ़ाई करके लौटे एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने अपनी पत्नी को ऐसी मौत दी कि किसी का भी कलेजा कांप जाएं, लेकिन उस जुर्म को करते हुए उसके हाथ नहीं कांपे।

देहरादून में पत्नी के 72 टुकड़े किए
राजेश गुलाटी और अनुपमा देहरादून की एक पॉश कॉलोनी में रहते थे। उनके दो जुड़वा बच्चे भी थे। देखने में बेहद खुशहाल परिवार। राजेश और अनुपमा की लव मैरिज हुई थी। बाहर से देखने में सबकुछ बहुत काफी अच्छा नज़र आता था, लेकिन हकीकत बिल्कुल अलग थी। 18 अक्टूबर के दिन राजेश और अनुपमा के बीच कुछ कहासुनी हुई। राजेश ने अनुपमा को धक्का दे दिया। वो जमीन गिर पड़ी। राजेश का गुस्सा अभीभी शांत नहीं हुआ। उसने अनुपमा का गला दबाकर उसकी जान ले ली।

डीप फ्रीजर में रखे शव के 72 टुकड़े
करीब 2 दिन तक पत्नी के शव को बाथरूम में रखा। घर में दो बच्चे भी मौजूद थे। पत्नी का शव बाथरूम में था, लेकिन ये सामान्य ज़िंदगी जी रहा था। घर में मौजूद बच्चों को भी इसने हत्या की भनक तक न लगने दी। शव को सड़ने से बचाने के लिए ये एक बड़ा डीप फ्रीजर ब़ाजार से खरीद कर लाया। उसके बाद इसने किचन के ही चाकू से पत्नी के 72 टुकड़े किए और उन टुकड़ों को अलग-अलग प्लास्टिक की थैलियों में भरकर डीप फ्रीज कर दिया।

शव के टुकड़ों को मसूरी के जंगल में फेंका
राजेश गुलाटी घर में ये बच्चों के सामने एकदम सामान्य व्यवहार करता,जैसे कि जैसे कुछ हुआ ही न हो। जब बच्चे मां के बारे में पूछते तो ये कहता कि मां नाना के घर गई है। बच्चों को नाश्ता बनाकर देता, उन्हें स्कूल भेजता और खुद भी अपने ऑफिस जाता। छुट्टी वाले रात में जब बच्चे सो जाते तो अपने पत्नी के शव के कुछ टुकड़े मसूरी के जंगलों में फेंक आता और सुबह बच्चों के उठने से पहले घर आ जाता। काफी दिनों तक ये सिलसिला चलता रहा। राजेश गुलाटी अपनी पत्नी के शव का निचला हिस्सा ठिकाने लगा चुका था। अब बस कुछ ही टुकड़े फ्रिज में रह गए थे। इसी दौरान अनुपमा के चचेरे भाई को राजेश पर शक हो गया।

राजेश-अनुपमा की कहानी खौफनाक है
राजेश ने अपने ससुरालवालों को कहा कि अनुपमा उससे नाराज होकर कही चली गई है। अनुपमा की भाई की शिकायत पर ही पुलिस ने जांच शुरू की। राजेश से भी सख्ती के साथ पूछताछ हुई और फिर सामने आया हैवानियत भरा राजेश का ये खेल। राजेश को अनुपमा की लाश ठिकाने लगाने का ये तरीका हॉलीवुड की एक फिल्म से मिला था। अनुपमा के कत्ल के आरोप में राजेश को उम्रकैद की सजा मिली, लेकिन ये कत्ल की ये खौफनाक वारदात ने सबके दिमाग में एक अजीब डर बना दिया था।

मुंबई का
पहले किसी अपने का कत्ल करने की हिम्मत और फिर उसकी लाश को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर घर में फ्रिज में रखना क्रुरता की हर सीमा को पार करता है। मुबंई में 2008 में नीरज ग्रोवर मर्डर केस भी हैवानियत की इसी श्रेणी में आता है। हम आपको बता दें नीरज ग्रोवर एक टीवी प्रोड्यूसर था जिसका मर्डर होता है और इस मर्डर केस को सॉल्व करने में पुलिस को एड़ी-चोटी का दम लगाना पड़ता है, तब जाकर सामने आती है इस मर्डर केस के पीछे छुपी हैवानियत।

लव ट्राएंगल में हुआ था कत्ल
नीरज ग्रोवर मर्डर केस की कहानी शुरू होती है लव ट्राएंगल से। इस लव ट्राएंगल में एक नाम नीरज ग्रोवर, दूसरा नाम कन्नड़ अभिनेत्री मारिया सुसाइराज और तीसरा नाम नेवी ऑफिसर मैथ्यू का है। मैथ्यू और मारिया सगाई कर चुके हैं। नीरज, मारिया का दोस्त है। 7 जुलाई 2008, मारिया को अपना घर शिफ्ट करना है, नीरज घर शिफ्टिंग के लिए मारिया के घर जाता है और रात को वही रुकता है। इसी रात जब कोच्ची से मैथ्यू का फोन मारिया के पास आता है तो पीछे से नीरज की आवाज सुनकर वो नाराज़ हो जाता है। वो मारिया से कहता है कि नीरज को घर से बाहर निकाले। मारिया जब इनकार करती है तो मैथ्यू का गुस्सा आसमान छूने लगता है। वो उसी रात कोच्ची से फ्लाइट लेकर मुंबई आता है।

लाश के किए गए 300 टुकड़े
मलाड में मारिया के फ्लैट में नीरज और मैथ्यू के बीच जमकर लड़ाई होती है। इसी दौरान मैथ्यू, नीरज को चाकू मार देता और उसकी मौत हो जाती है। अब घर में मारिया है, मैथ्यू है और नीरज की लाश। मारिया और मैथ्यू नीरज की लाश को ठिकाने लगाने का प्लान बनाते हैं। वो नीरज की लाश के 300 टुकड़े करते हैं और प्लास्टिक के बैग्स में भरते हैं। दोनों कार लेकर जंगल जाते हैं और लाश के टुकड़ों को जंगल में अलग-अलग जगह पर डाल देते हैं। रातभर मारिया के फ्लैट में ये खौफनाक खेल चलता है और फिर अगले दिन से ये दोनों सामान्य जिंदगी बिताने लगते हैं।

फिल्मी कहानी की तरह हैं ये असल मर्डर
कई दिन तक जब नीरज ग्रोवर का कोई पता नहीं चलता तो फिर शुरू होती है जांच-पड़ताल। मारिया से पूछताछ की जाती है। वो तमाम तरह की झूठी कहानियां बनाने की कोशिश करती है, लेकिन एक दिन आखिरकार वो सच उगल ही देती है। सोसाइटी का गार्ड भी बताता है कि उस रात मारिया और उनका मंगेतर प्लास्टिक बैग में कुछ भरकर ले जा रहे थे। नीरज ग्रोवर केस में मैथ्यू को उम्र कैद होती है जबकि मारिया को सबूत मिटाने के आरोप में 3 साल की सजा। ये तमाम मामलों में सुनकर ऐसा लगता कि जैसे कोई बॉलीवुड या हॉलीवुड फिल्म की स्क्रिप्ट हो, लेकिन ये दरिंदगी हकीकत में हुई और अपनों ने ही अपनों के साथ की।