30 बच्चियों के हत्यारा किसी तरह की दया का हकदार नहीं… साइको किलर को सजा सुनाते वक्त भड़के जज

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नई दिल्ली: बच्चों के साइको किलर और रेपिस्ट रविंदर कुमार को अदालत ने उम्र कैद की सजा सुनाई। सजा सुनाने के दौरान जज सुनील कुमार ने कहा कि रविंदर ने जो किया वो किसी शिकारी से कम नहीं है। वो किसी दया का हकदार नहीं है। 31 साल के रविंदर को जुलाई 2015 में उत्तर पश्चिमी दिल्ली के बेगमपुर में छह साल की एक बच्ची के अपहरण, यौन उत्पीड़न और हत्या के लिए 6 मई को दोषी ठहराया गया था।

रियरेस्ट ऑफ रेयर श्रेणी में नहीं आता मामला
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुनील कुमार ने गुरुवार को सजा सुनाते हुए कहा कि कई कानूनी कारणों से ये अपराध ‘रियरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में नहीं आता है। लेकिन दोषी का अपराध जघन्य और अमानवीय था, जिसके लिए वह दया या सहानुभूति के लायक नहीं है। अदालत ने कहा कि इस मामले में कुछ संदेह वाली चीजें भी हैं। सबसे पहली तो ये कि दोषी का डीएनए केवल बच्ची के पायजामा पर पाया गया था, न कि पीड़िता के शरीर के किसी अंग पर।

‘दोषी के साथ कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए’
एडिशन सेशन जज ने अपने आदेश में कहा, ‘मुझे यह कहने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि दोषी का अपराध किसी दरिंदे की हरकत से कम नहीं है और इसने समाज की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है। मेरा दृढ़ मत है कि दोषी के साथ कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए और अधिकतम सजा दी जानी चाहिए ताकि समाज में यह संदेश जाए कि हमारी न्याय व्यवस्था के तहत अपराधियों के लिए कोई सहानुभूति नहीं है और हर एक दोषी को उपयुक्त सजा दी जाएगी।’ अदालत ने पाया कि पीड़िता छह साल की एक मासूम बच्ची थी और अपराधी के सामने बेबस थी। वह अपराधी की मंशा और वासना से भी अनजान थी। दोषी ने उसका यौन शोषण किया और फिर बेरहमी से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी थी।

‘बच्ची ने बचने के लिए किया था संघर्ष’
जज ने अपने आदेश में कहा, ‘सबूतों से यह साफ है कि घटना के वक्त बच्ची ने संघर्ष किया था। उसने बचने की कोशिश की थी। लेकिन दोषी ने एक दानव की तरह उस पर कोई दया नहीं दिखाई और उसके साथ रेप किया।’ आदेश में कहा गया है कि मृत बच्ची से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह दोषी को उसका यौन उत्पीड़न करने और उसकी हत्या करने के लिए उकसाएगी। दोषी द्वारा किया गया अपराध एक क्रूर बलात्कार और हत्या था।

‘जिंदगी भर जेल में ही रहेगा दोषी’
विशेष सरकारी वकील विनीत दहिया ने कहा, ‘एएसजे ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद स्वीकार किया कि दोषी का अपराध अमानवीय और भयावह था और वह किसी भी तरह की नरमी के लायक नहीं था। दहिया ने कहा कि अदालत ने दोषी को उसके शेष प्राकृतिक जीवन के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि वह अपनी आखिरी सांस तक जेल में रहेंगा। सजा काटने के 14 साल बाद भी वह जेल से बाहर नहीं आ पाएगा।’

‘दोषी के वकील ने लगाई थी दया की गुहार’
इससे पहले, 20 मई को बहस के दौरान दोषी के वकील अभिषेक श्रीवास्तव ने अदालत से निवेदन किया था कि दोषी के खिलाफ नरमी बरती जाए। श्रीवास्तव ने तर्क दिया कि दोषी युवा था और किसी अन्य अपराध में पहले से दोषी नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि रविंदर कुमार अविवाहित थे और उनके वृद्ध माता-पिता थे जो जीवित रहने के लिए उन पर निर्भर थे, जो खुद गरीब थे। श्रीवास्तव ने कहा कि दोषी समाज के आर्थिक रूप से वंचित तबके से आता है और सजा तय करते समय इस तथ्य को ध्यान में रखा जाना चाहिए।