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कोरोना से जंग के लिए देश कितना तैयार? समझें मॉक ड्रिल और लॉकडाउन में क्या कनेक्शन

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चीन समेत दुनिया के कई देशों में कोरोना कहर बरपा रहा है. देश में चीन जैसे हालात न बनें, सब वेरिएंट बीएफ.7 के कहर वाला पैनिक बटन न दबे, नाइट कर्फ्यू या लॉकाउन जारी न करना पड़े इसलिए केंद्र और राज्यों ने कोरोना से निपटने को लेकर अपनी तैयारी शुरू कर दी है. हालांकि भारत में अभी हालात सामान्य हैं लेकिन आपात स्थिति से निपटने की हमारी क्या तैयारी है, इसके लिए आज पूरे देश में सर्वे किया गया है.

उत्तर से लेकर दक्षिण तक, पूर्व से लेकर पश्चिम तक सभी हेल्थ सेंटर पर मॉक ड्रिल की गई, इससे पता चल गया कि चाइनीज वायरस से निपटने के लिए हम कितने तैयार हैं. देश में कोरोना के हर एंट्री प्वॉइंट का ऑन लोकेशन सर्वे किया गया. यह सर्वे दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, यूपी, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और असम में किया गया.

कोरोना को लेकर लोगों के मन में हैं ये सवाल

– मरीजों के लिए वेंटीलेटर वाले बेड हैं या नहीं?

– पर्याप्त आईसीयू वॉर्ड हैं या नहीं?

– प्राइवेट और सरकारी हॉस्पिटल में कोविड के सेपरेट बेड हैं या नहीं?

– आपातकाल स्थिति से निपटने को हेल्थ विभाग की टीम तैयार हैं या नहीं?

– ऑक्सीजन प्लांट एक्टिव हैं या नहीं?

– हॉस्पिटल में दवाओं की डिमांड एंड सप्लाई की स्टेटस रिपोर्ट क्या है?

जानिए इन अहम बिंदुओं पर देश के हालात

– बूस्टर डोज: इसका रिजल्ट डराने वाला हैं क्योंकि टेस्ट में करीब 70 प्रतिशत फेल हैं.

– वैक्सीन: वैक्सीन की डिमांड एंड सप्लाई को देखें तो सरकार को पूरे नंबर मिले.

– वेंटीलेटर: कोरोना की पहली लहर के बाद सरकार ने पर्याप्त वेंटीलेटर सभी राज्यों को मुहैया करवाए. इस सब्जेक्ट में डिक्टेंशन से सरकारें पास हुईं.

– ऑक्सीजन: कोविड की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी हुई थी, लिहाजा हॉस्पिटल में ऑक्सीजन के प्लांट लगाए गए थे. सर्वे में ऑक्सीजन के व्यवस्था बहुत अच्छी मिली.
– हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर: ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी इलाकों में हेल्थ सिस्टम पहले से बेहतर है. इसमें 60 प्रतिशत नंबर मिले हैं.

देशव्यापी लॉकडाउन का कोई चांस नहीं

पीएम नरेंद्र मोदी ने 25 मार्च 2020 से 14 अप्रैल 2020 तक यानी 21 दिनों के राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन का ऐलान किया था. दुनियाभर की कोरोना रिपोर्ट को देखते हुए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन का 31 मई 2020 तक एक्सटेंशन किया गया, लेकिन 1 जून 2020 से राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन को चरणबंध तरीके से अनलॉक किया गया. मतलब यह कि राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन दोबारा नहीं लगा. इस दौरान कोविड की कई लहर आईं. अब लॉकडाउन का फैसला राज्य सरकारों पर छोड़ दिया गया. बहरहाल अभी देश में राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की आशंका न के बराबर है.

लॉकडाउन यानी पूरे इलाके को सीज करना देना. आपातकाल सेवाओं को छोड़कर सार्वजनिक जगहों में प्रवेश पर पूरी तरह बैन कर देना. इसके पीछे कोरोना वायरस को कंट्रोल करना ही मकसद होता है. अगर कोविड से लड़ने की तैयारी पूरी है तो लॉकडाउन की नौबत नहीं आएगी. मॉकड्रिल के रिजल्ट से सरकार को पता चल गया कि कोरोना से लड़ने की तैयारी कितनी फुलप्रूफ है. सर्वे के नतीजों से पहला चलता है कि देश में कोरोना को लेकर जो मौजूदा इंतजाम हैं, उससे आसानी से कोरोना से लड़ा जा सकता है.

भले ही हम सुरक्षित हों लेकिन हमें कोविड प्रोटोकॉल का ईमानदारी से पालन करते रहना है. त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए हमें मास्क लगाना बंद नहीं करना चाहिए. भीड़भाड़ वाली जगह में जाने से बचना चाहिए. हाथ धोते रहना चाहिए.

कोरोना फैलने से रोकने की तैयारी कर रहे: मंडाविया

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि चीन और अन्य देशों में संक्रमण में वृद्धि के बाद एहतियाती उपायों के तहत देशभर में सभी कोविड अस्पतालों में हुई मॉक ड्रिल में राज्य के सभी स्वास्थ्य मंत्री अपने स्तर पर हिस्सा लिया. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इस मॉकड्रिल से हमें ये जानने में मदद मिली कि किस स्तर पर क्या कमी रह गई है, जिसे हम दुरुस्त कर सकेंगे.

साथ ही हमारी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया मजबूत होगी. मॉकड्रिल में सभी जिलों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता, आइसोलेशन बेड की क्षमता, ऑक्सीजन-डेडिडेकेट बेड, आईसीयू बेड, वेंटिलेटर, डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिक्स, आयुष डॉक्टरों और अन्य फ्रंटलाइन संसाधनों की तैयारियों को परखा गया.

जानिए कहां, कैसी है तैयारी

– भोपाल के जेपी जिला अस्पताल में 160 बेड कोविड के लिए डेडिकेट किए गए हैं. यहां कोविड वॉर्ड बनाया गया है. यह प्रयास किए जा रहे हैं कि कोई भी एंबुलेंस किसी मरीज को लेकर आए तो उसे सीधे कोविड वार्ड में ले जाया जाए. निजी सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं. साथ ही ऑक्सीजन के 150 जंबो सिलेंडर भी रिजर्व में रखे गए हैं. ऑक्सीजन के 3 प्लांट शुरू किए गए हैं. उनकी मॉनीटरिंग हो रही है.

– जम्मू के अलग-अलग अस्पतालों में मॉकड्रिल हुई. यहां एमसीएच में ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर्स, मॉनीटर्स को परखा गया. इस दौरान एक व्यक्ति को बेड पर लेटाकर ये जांच की गई कि अगर जरूरत पड़ी तो कोविड के मरीजों के इलाज में कोई खामी न रहे. साथ ही ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट का भी जायजा लिया गया.

– गुजरात के अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में कोविड को लेकर कई स्तरों पर तैयारियां की गई हैं. यह 1200 बेड का अस्पताल है, कोरोना की पिछली लहर में इसे कोविड अस्पताल घोषित कर दिया था. मॉकड्रिल के दौरान ऑक्सीजन सप्लाई, ओपीडी के साथ ही कोविड के 80 से ज्यादा बेड का प्रबंध किया गया है. साथ ही वेंटिलेटर्स और दवाओं का भी इंतजाम किया गया है.

– चंडीगढ़ के अस्पताल में मॉकड्रिल के दौरान ये परखा गया कि जब कोई कोविड मरीज एंबुलेंस से आता है, तो उसे किस तरह से अस्पताल में ले जाना है. साथ ही कौन सी सावधानियां बरतनी है. इसके अलावा अस्पताल में कोविड सेंटर भी बनाया गया है. इसके अलावा ऑक्सीजन सप्लाई और वेंटिलेटर्स को भी दुरुस्त किया गया है.

– यूपी की राजधानी लखनऊ के केजीएमयू में मास्क, ग्लव्स, थर्मल स्कैनर समेत सभी उपकरणों की उपलब्धता देखी गई. साथ ही वेंटिलेटर्स और वेड भी तैयार किए गए हैं.

– दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में एक टेस्टिंग सेंटर बनाया गया है. यहां स्वास्थ्य कर्मी पीपीई किट पहनकर तैनात हैं. साथ ही यहां आइसोलेशन और आईसीयू बेड भी लगाए गए हैं, यहां ऑक्सीजन सप्लाई भी दी गई है.