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इस सप्ताह अचानक इतना सस्ता हुआ सोना, 24 कैरेट गोल्ड का दाम कितना?

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लगातार तेजी के बाद अब सोने के भाव (Gold Price) में नरमी देखने को मिल रही है. इस सप्ताह सोने की कीमतों (Weekly Gold Price) में गिरावट देखने को मिली. सबसे बड़ी बात ये रही कि गोल्ड का भाव 60 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम रुपये के आंकड़े से नीचे आ गया है. इस सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को सोने की कीमतें 59,960 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुईं. वहीं, पिछले सप्ताह के आखिरी दिन गोल्ड का भाव 60,322 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर क्लोज हुआ था.

हफ्तेभर ऐसा रहा सोने का भाव

IBJA Rates के अनुसार, इस सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को सोने की कीमतें 59,601 रुपये पर बंद हुईं. मंगलवार को भाव में तेजी देखने को मिली और ये 60 हजार रुपये के आंकड़े को पार कर 60,003 रुपये प्रति 10 ग्राम पर क्लोज हुईं. बुधवार को सोने का रेट 59,957 और गुरुवार को 59,570 रुपये पर प्रति 10 ग्राम के स्तर पर क्लोज हुआ. शुक्रवार को सोने थोड़ा महंगा होकर 59,960 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ.

कितना सस्ता हुआ सोना

पिछले सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को गोल्ड की कीमतें 60,322 रुपये पर बंद हुई थीं. इस तरह गोल्ड की कीमतें इस सप्ताह 362 रुपये प्रति 10 ग्राम घटी हैं. इस हफ्ते मंगलवार को सोना सबसे महंगा 60,003 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर बिका और गुरुवार को कीमतें सबसे कम 59,570 रुपये प्रति 10 ग्राम रहीं.

24 कैरेट गोल्ड के भाव

इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 24 कैरेट वाले सोने का दाम 9 जून 2023 को अधिकतम 59,976 रुपये रहा. वहीं, 22 कैरेट वाले गोल्ड का दाम 59,736 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा. सभी तरह के गोल्ड के रेट की गणना टैक्स के बिना की गई है. सोने पर जीएसटी शुल्क अलग से देना होता है. इसके अलावा गहने पर मेकिंग चार्ज देना पड़ता है. इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (Indian Bullion Jewelers Association) की ओर से जारी कीमतों से अलग-अलग प्योरिटी के सोने के स्टैंडर्ड भाव की जानकारी मिलती है.

 

क्यों चमका सोने का भाव?

अमेरिकी बैंकिंग संकट ने आर्थिक मंदी की आशंका को बढ़ा दिया है. अमेरिका में लगातार बैंकों की वित्तीय स्थिति बिगड़ रही है. ऐसी स्थिति में सोने का भाव चमका है. बाजार विश्लेषकों के अनुसार, गर्मी परंपरागत रूप से सोने की कीमतों के लिए एक कमजोर मौसम है. क्योंकि पीली धातु की मांग को बढ़ावा देने के लिए निकट भविष्य में कोई महत्वपूर्ण कारण नजर नहीं आते हैं.