आयोग ने यह फैसला अंबुजा मॉल से जुड़े केस नंबर DC/387/CC/2025/198 में सुनाया गया, जिसमें परिवादी हाईकोर्ट वकील अंजिनेश अंजय शुक्ला ने स्वयं पैरवी की। केस डायरी के अनुसार 15 जून 2025 को शुक्ला अपने वाहन (CG 10 BM 9901) से अंबुजा मॉल पहुंचे थे, जहां उनसे 30 रुपए पार्किंग शुल्क लिया गया। उन्होंने यह कहते हुए विरोध किया कि उन्हें पार्किंग का उपयोग नहीं करना है, बल्कि केवल अपनी माता को छोड़कर जाना है। लेकिन मॉल प्रबंधन ने फ्री पिक-अप/ड्रॉप सुविधा से इनकार कर दिया। इससे आहत होकर उन्होंने उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर करते हुए पार्किंग शुल्क को अवैध घोषित करने और मानसिक क्षति के लिए ₹50,000 मुआवजे की मांग की।
सुनवाई के दौरान परिवादी ने गुजरात हाईकोर्ट और अन्य उपभोक्ता आयोगों के फैसलों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि मॉल द्वारा पार्किंग शुल्क वसूली गैरकानूनी है। आयोग ने प्रस्तुत तथ्यों और कानूनी दृष्टांतों को स्वीकार करते हुए मॉल प्रबंधन के खिलाफ फैसला सुनाया।