छत्तीसगढ़ के इस जिले में है तोते की मजार, आम लोगों के साथ मुख्यमंत्री भी हैं फरियादी

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अंबिकापुर. आपने सूफी संतों का मज़ार देखा होगा. बाबाओं का मज़ार भी देखा होगा परंतु क्या आपने तोते का मज़ार देखा है . छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में एक ऐसा ही मज़ार स्थित है जहां एक तोते को चादर चढ़ाया जाता है. लोग दूर-दूर से आकर इस तोते को चादर चढ़ाते है. आम लोगों के अलावा मुख्यमंत्री भी इस तोते की मज़ार में चादर चढ़ा चुके है. अंबिकापुर के तकिया गांव में बाबा मुरादशाह वली और मोहब्बत शाह वली का मज़ार है. जिसे तोते का मज़ार भी कहा जाता है. इस मज़ार को तोते का मज़ार क्यों कहा जाता है और अंबिकापुर में यह मज़ार क्यों बनाया गया इसकी कहानी आपको बताते है.

तकिया शरीफ के नाम से प्रसिद्ध बाबा मुराद शाह वली और मोहब्बत शाह वली का यह मज़ार लगभग 300 साल पुराना है. इस मज़ार के मौलाना मो. मोइनुद्दीन ने बताया कि बाबा मुरादशाह अंबिकापुर के इस जगह से गुजर रहे थे और हुक्का पीने के लिए उन्होंने एक कुम्हार महिला के घर पनाह ली. बाबा ने उस महिला को आग जलाने के लिए कहा तब उस महिला ने बताया कि उसके घर में चार दिन से खाना नहीं बना है. बाबा ने इसका कारण पूछा तो महिला ने बताया कि इस इलाके में एक राक्षसी रहती है और वह इस गांव के बच्चों की बलि मांगती है. आज मेरे बेटे की बारी है. इसलिए मेरे घर में चूल्हा नहीं जला है. यह सुनकर बाबा ने उस महिला से कहा कि तुम्हारे बेटे की जगह उस राक्षसी के पास मैं जाऊंगा.

चमत्कार देखकर ग्रामीण हुए थे प्रभावित
बाबा उस राक्षसी के पास जाते है और जब राक्षसी बाबा पर हमला करती है तो बाबा चिमटे से उस राक्षसी के नाक और कान दबा देते है. जिससे वह राक्षसी पानी मांगने लगी और बाबा ने जमीन में चिमटे से पानी निकाल कर उसको पानी दिया. जिसके बाद वह राक्षसी बाबा की भक्त हो गई. बाबा का यह चमत्कार देखकर गांव वाले बाबा को पूजने लगे और इसी कारण ही अम्बिकापुर के तकिया गांव में बाबा का मज़ार मौजूद है.

इसलिए बना तोते का मज़ार
इसे तोते का मज़ार इसलिए कहा जाता है क्योंकि बाबा मुरादशाह वली और मोहब्बतशाह वली दो भाई थे. बाबा मोहब्बत शाह के पास एक तोता था. इस तोते को कुरान की सारी आयतें याद थी. मौलाना ने बताया कि दोनों भाई इस तोते के जरिए संवाद किया करते थे. जब वो अलग-अलग स्थानों पर होते थे. यह तोता बाबा मोहम्मद शाह वली का बहुत अजीज़ था इसलिए उन्होंने गांव वालों से कहा था कि यह तोता जीवन भर मेरे साथ था. मरने के बाद भी तोते को मेरे साथ ही रखना और इसलिए इस मज़ार में बाबा मुरादशाह और बाबा मोहब्बत शाह के साथ उनके तोते का मज़ार भी है.

मुख्यमंत्री भी है फरियादियों में शामिल
इस मज़ार में लोग भारत के अन्य राज्यों से भी चादर चढ़ाने आते है. यहां आने वाले फरियादियों की सारी मुरादें पूरी होती है. मौलाना मो. मोईनुद्दीन ने बताया कि इस मज़ार में छत्तीसगढ़ के आज तक पदस्थ रहे सभी मुख्यमंत्री भी मुराद मांगने आ चुके है.